आकाश का टुकड़ा
उतर रहा धरती पर
धीरे-धीरे
भू-मंडल की मस्त चहक
कूके जैसे कोयल
नीले अम्बर में तारों सी
चुनरी ओढ़े दुल्हन
नख शिख है सुर शोभित
कानन हरीयल मोती
धरती की हरियाली सी
पहने गोरी चूडियन
धानी-धानी लहंगा पहने
धरा ताक रही है
आकाश को तमन्ना से
फिर से।
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